Tuesday, 22 September 2026

व्हाट्सऐप, टूटी टाँग, और हैपी होली

 


व्हाट्सऐप ने दुनिया भर के देशों की जीडीपी को बहुत धक्का पहुँचाया है। एक पूरा का पूरा ग्रीटिंग कार्ड का उद्योग बंद हो गया है - काग़ज़ के कारख़ाने, आर्टवर्क वाले चित्रकार, प्रिंटिंग प्रेस, सब बंद - यहाँ तक कि डाक टिकटों की बिक्री भी गिर गई है। पहले लोग हर त्योहार और उत्सव के पहले बड़े उत्साह से ग्रीटिंग कार्ड की दुकान पर जाते थे और चाव से हर दोस्त-रिश्तेदार के लिये कार्ड ख़रीदते थे। होली, दीवाली, दुर्गापूजा, क्रिसमस और नये साल के लिये बधाई और शुभकामनाओं के कार्ड और उनके रंग-बिरंगे लिफ़ाफ़े लिये जाते थे। दुकानदार भी बड़ी साज-सज्जा के साथ इन कार्डों की नुमाइश लगाते। बधाई भेजने के लिये भी बड़ी वेराईटी के कार्ड ख़रीदे जाते थे। अब होली का एक जैसा ही कार्ड हर रिश्तेदार को तो नहीं भेज सकते ना? कहीं पटना वाली कमला बुआ ने राँची वाले चाचा से नोट्स एक्सचेंज कर लिया तो?

 

अरे रज्जू, क्या बड़के भईया के मँझले बेटे ने तुम्हें भी वही कार्ड भेजा हे जिसमें ऊपर के दाहिने कोने से कान्हा की पिचकारी से लाल रंग निकलकर निचले बायें कोने पर राधारानी तक पहुँचते-पहुंचते पीला हो जाता है? फ़ोन पर ही रज्जू चाचा ने कहा कि हाँ दीदी, भेजा तो वही कार्ड है। अब कमला बुआ शुरु हो गईं - देखो तो जरा, इस लड़के में इतना भी शऊर नहीं कि कार्ड तक सबकी पसंद और लिहाज़ से ख़रीदें, सबको एक ही बाट से तौल दिया। अब क्या कहें रज्जू, बिमला भाभी ने बच्चों को ज़रा भी संस्कार नहीं दिये। बाबूजी बड़े भईया की शादी मेरी सहेली सरला से कराने को मान जाते तो उनकी संतानें इतनी संस्कारहीन तो नहीं होतीँ। क्या ज़िंदगी रह गई है बड़के भईया की! चलो छोड़ो, मुझे क्या? अब दीवाली में देखेंगे।

 

पर कमला बुआ क्या जानती थीं कि दीवाली के पहले ग्रीटिंग कार्डों का उद्योग ही धराशायी हो जायेगा और व्हाट्सऐप सारे संस्कारों और शुभकामनाओं पर कृत्रिमता का ऐसा मुलम्मा चढ़ा देगा कि क्या कमला बुआ, और क्या उनकी चार ननदें, सबकी सब वही व्हाट्सएप मेसेज एक दूसरे को, और यहाँ तक कि रज्जू और बड़े भईया को भी एक ही क्लिक में फ़ॉर्वर्ड कर डालेंगी। अब तो लोग कई बार वही शुभकामना संदेश फ़ॉरवर्ड कर डालते हैं, जो पिछले साल से ही घूम रहा होता है, बिनाफ़ॉर्वर्डेड मेनी टाईम्सके बिल्ले की परवाह किये। अब क्या संस्कार और कैसा लिहाज़

 

एक-दो वर्षों से जब से आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से बने चित्र और एनिमेशन चल पड़े हैं, ऐसा लगने लगा था कि चलो थोड़ी वेराईटी तो आई। पर फिर वही ढाक के तीनों पात - फ़ॉर्वर्ड करो, बार-बार फ़ॉर्वर्ड करो, और सोचो कि हमने कुछ ओरिजिनल कर डाला है क्योंकि नाचते हुए गणेश भगवान और थिरकते हुए राधा-कृष्ण का वीडियो जो भेजा है। यह अलग बात है कि एक भी वाक्य अपनी तरफ़ से लिखने की ज़हमत नहीं उठाई।

 

व्हाट्सऐप ने शुभकामना संदेश और शोक संदेश भेजना इतना आसान कर दिया है कि कभी-कभी बड़ी गड़बड़ हो जाती है। मैंने एक मित्र की टाँग टूटने पर संदेश भेज दिया - “मेनी-मेनी हैपी रिटर्न्स ऑफ डे”। मित्र भड़क गये, बोले, प्लास्टर कटने दो फिर आकर तुम्हारी खबर लेता हूँ। मैंने झटपट सोचा किगेट वेल सूनलिखकर मामले को सलटा दूँ, पर जल्दबाज़ी मेंकॉंग्रेचुलेशन्स ऑन न्यू अराईवलका मेसेज फ़ॉर्वर्ड हो गया। मित्रवर प्लास्टर लगे-लगे बैसाखी के सहारे धमके। साथ में उनकी श्रीमती जी भी डंडा लेकर पहुँची। पता चला कि उनकी पड़ोस वाली भाभी को बेटा हुआ था और मेरे फ़ॉर्वर्ड ने पूरे मुहल्ले में तहलका मचा दिया था। आख़िर मैंने अपने मित्र को बधाई क्यों भेजी? क्या मेरे पास कोई अंदर की खबर थी?

 

अब डंडा मेरे सिर पर या मेरे मित्र के सिर पर बरसा, इसकी कथा फिर कभी। तब तक के लिये आप लोगों को मेरी तरफ़ सेटेक केयरऔररेस्ट इन पीस

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