हे गालगोटिया के आचार्यों!
अगली टेक्नॉलॉजी की प्रदर्शिनी जब होवे, तब आपको सलाह है कि सड़क पर से एक आवारा कुत्ता पकड़ लाना। आवारा कुत्तों की दिल्ली की सड़कों, सोसाइटियों और पार्कों में कोई कमी नहीं - पशुप्रेमी आंटियों, कुत्ता-कटित-पीड़ित नागरिकों, और सर्वोच्च न्यायालय की त्रिकोणीय मुकदमेबाजी ने इतना तो तय कर दिया है कि भारत में आवारा कुत्ते फलते-फूलते रहेंगे। आप तो बस एक टॉमी पकड़ लाना, और उसे नहला-धुलाकर एक हरा-पीला-लाल जैकेट पहना देना। आपके स्टॉल पर बैठा रहेगा और आने-जाने वालों से बिल्कुल लोहे वाले चीनी कुत्ते की तरह बिस्किट-ब्रेड पाकर सलाम करेगा। नाम रखना बायो-मिमिक डॉगॉयड, बिल्कुल ह्यूमैनॉयड का पालतू पशु। साथ में एक प्रोफेसर को भी खड़ा कर देना - ह्यूमैनॉयड ऐंड हिज बेस्ट फ्रेंड - डॉगॉयड। ना चार्जिंग का झंझट, ना ही सॉफ्टवेयर अपडेट का। ज़रूरत पड़ने पूरा कुत्ता ही अपडेट कर लेना, कोई मोती या लकी पकड़ लाना।
तीन-चार दिन बेचारा टॉमी बिस्कुट-ब्रेड-बर्गर खाकर एयरकंडीशन में कालीन पर लोट-पोट हो लेगा और जब आप उसे भगा देंगे तो अपने यार-दोस्तों को सालभर अपने ऐश की कहानियॉं सुनायेगा। उसके बाद तो आपकी यूनिवर्सिटी के फाटक पर कुत्तों की लाईन लग जायेगी - गुरुजी, अबकी बार मैं जाऊँगा, मैं जैकी, उस नौसिखिये टॉमी से बेहतर रोबॉटनुमा करतब कर सकता हूँ। फिर आप कुत्तों का एक एंट्रेंस एग्ज़ाम शुरु कर देना। देशभर के लाखों-करोड़ों कुत्तों के लिये रेलविभाग एग्ज़ाम-स्पेशल ट्रेनें चलायेगा। रास्ते भर हर स्टेशन पर बिस्कुट पानी की व्यवस्था होगी। फेरीवाले घूम-घूम कर कुत्तों के पट्टे और जैकेट बेचेंगे। देश की अर्थव्यवस्था में चार चाँद लगेंगे, जीडीपी की दर आसमान छुएगी।
नेहा मैडम और उनकी सखियों को कुत्तों के इंटरव्यू में लगा देना, फिर देखना कैसे सिक्स के नाईन और नाईन के सिक्स होते हैं।पर आपके तो पौ-बारह ही होंगे। एग्ज़ाम की फ़ीस से ही करोड़ों की कमाई होगी। फिर क्या चीन, और क्या चीन का कुत्ता। आप तो कुत्ताबॉट वाली कंपनी ही ख़रीद डालना।
और वो थर्मोकोल का प्लास्टिक की पन्नी में लिपटा हवाई जहाज़ जो आपने शान से प्रदर्शित किया था, अरे वही वाला जो महीना भर पहले आपने पड़ोस के हाई स्कूल के दसवीं के छात्रों से ठेके पर बनवाया था, विज्ञान कम और विज्ञापन ज्यादा था। मेरी तो सलाह यही है कि वो तीन सौ पचास करोड़ वाला एआई सेंटर जो आपने बनाया है, उसे सेल्स और मार्केटिंग ऑफ़िस में तब्दील कर दें। यही शैक्षिक ईमानदारी ठीक रहेगी। बाक़ी रही एआई प्रदर्शनियों में भाग लेने की बात - तो चीन और कोरिया से अमेज़न पर ख़रीद कर दिखा देना बिल्कुल जैसे इस बार किया था। या यदि मेक इन इंडिया से दिल लगा हो तो पहाड़गंज से पकड़ा टॉमी तो है ही।
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शानदार !!
ReplyDeleteGazab
ReplyDeletelook for possibility of 69 in every situation. it gives better results. be casual whatever may be the occasion. take a u turn at first opportunity. these are the three takeaways.
ReplyDeleteअति उत्तम सलाह। गलघोंटुआ को पहुचना बहुत जरूरी है!
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